सुलझते रिश्ते
कभी अगर किसी रिश्ते में समस्या या अनबन हो जाए तो उसे समझदारी से सुलझाया जा सकता है, जैसे एक फटे हुए कपड़े को सिलकर फिर से उसका उपयोग किया जाए, बजाय उसे फेंकने और नया कपड़ा लाने के। यह उतना ही सरल हो सकता है जितना कि बैठकर कहना, 'दोस्त, यह हमारी समस्या है, और इसे हम इस तरह से ठीक कर सकते हैं। तेरे साथ जो रिश्ता है, उसे खोने का मैं साहस नहीं कर सकता।' इस तरह रिश्तों की डोर सुलझाई जा सकती है, क्योंकि किसी अच्छे रिश्ते के एहसास को खोना कभी भी एक विकल्प नहीं होना चाहिए।
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